स्वर्गीय राघोजी का पूरा जीवन युवाओं को मार्गदर्शन देने वाला है -विवेक कुमार सिंह

स्वर्गीय राघोजी  का 98 वां जन्मदिवस भारतीय जनता पार्टी के जिला प्रवक्ता विवेक कुमार सिंह के नेतृत्व में मनाया गया। उनके जन्मदिवस के अवसर पर आज उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण करने के बाद जिला प्रवक्ता ने उनके पूरे जीवन पर प्रकाश डाला एवं बताया कि
स्वर्गीय राघो जी का जन्म छपरा शहर के भगवान बाजार,  माल गोदाम रोड स्थित घर में दिनांक 30.09.1924 को हुआ था। उनके बाबूजी स्वर्गीय राम नारायण लाल छपरा जिला स्कूल में सन 1918 में हेड मास्टर थे और वे तिरहुत प्रमंडल के इंस्पेक्टर ऑफिस स्कूल्स के पद से अवकाश ग्रहण किए।
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बचपन से ही इनकी रुचि शिक्षा ,खेल ,संगीत और राजनीति मे थी। सन 1945 मैं इन्होंने राजेंद्र कॉलेज( पटना विश्वविद्यालय)  से स्नातक की डिग्री हासिल की, फिर पटना लॉ कॉलेज से इन्होंने वकालत की डिग्री भी हासिल की।
उन्होंने देश के लिए लड़ी गई स्वाधीनता आंदोलन( वर्ष1942 _1947  ) में अपनी अहम एवं प्रभावशाली भूमिका निभाई थी। राज्य के कई एक जगहों पर वे जेल में बंदी रहे। सन 1942 में इन्होंने छपरा शहर में शस्त्र बनाने का एक कारखाना भी खुलवाया था, साथ ही डायनामाइट से पुल उड़ाने का प्रशिक्षण भी लिया था। सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज की इकाई आजाद हिंद दस्ता छपरा के वे सक्रिय सदस्य भी थे तथा शहर में उस समय कई एक क्रांतिकारी कार्यों  को अंजाम दिया था।
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देश स्वाधीन होने के बाद केंद्र सरकार द्वारा प्रदत फ्रीडम फाइटर्स पेंशन योजना को उन्होंने सहर्ष ठुकरा दिया। वे देश की आजादी का मोल पैसों से नहीं करना चाहते थे। ऐसे राष्ट्रवादी महामानव विरले ही समाज में पैदा होते हैं। उनका पूरा जीवन सादगी एवं उच्च विचारों से परिपूर्ण रहा। उनकी राजनीतिक यात्रा कांग्रेस से प्रारंभ होकर जनसंघ तक रही। वैचारिक स्तर पर मतभेद के कारण कांग्रेस में ये ज्यादा दिनों तक रह नहीं पाए।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वे सक्रिय सदस्य विद्यार्थी जीवन में ही बन गए थे।
जनसंघ जो आज की भारतीय जनता पार्टी है एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (दोनों छपरा इकाई )की स्थापना सन 1952 में उनके द्वारा हुई थी तथा कई एक वर्षों तक वे छपरा जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष एवं सचिव रहे। भारती विद्या मंदिर बाद में परिवर्तित नाम सरस्वती शिशु मंदिर छपरा के वे कई एक वर्षों तक संस्थापक अध्यक्ष एवं सचिव भी रहे। सन 1962 में जनसंघ के टिकट पर वे छपरा से बिहार विधानसभा का चुनाव भी लड़े।
वर्ष1975 में देश में जब आपातकाल की घोषणा हुई ,तो इन्होंने इसका जबरदस्त विरोध किया था। इस जिले का प्रथम केस इनके विरूद्ध दर्ज हुआ था। कुल 4 केस इनके विरूद्ध दर्ज हुए थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या करने की साजिश करने का आरोप भी इन पर लगा था तथा केंद्र से जांच करने के लिए पूरी टीम छपरा आई थी ,परंतु यह विरोधियों द्वारा एक नाकाम कोशिश थी ।स्वामी विवेकानंद और सुभाष चंद्र बोस विद्यार्थी जीवन से ही इनके आदर्श रहे।
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सन 1952 में छपरा विधि मंडल की सदस्यता वकील के रूप में इन्होंने ग्रहण की।66 वर्षों तक छपरा विधि मंडल में इन्होंने गुणवत्तापूर्ण वकालत कर एक कीर्तिमान स्थापित किया तथा पूरे प्रमंडल के लोगों की उन्होंने सेवा की। वे गरीबों का मसीहा  भी थे। राजनैतिक और वैचारिक मतभेद के बावजूद उनके कई एक परम विश्वसनीय मित्र उस समय अन्य राजनीतिक दलों में थे।वे अपने व्यवहार से सभी को प्रभावित किए।
वैसे महामानव का महाप्रयाण 06 जून 2016 को 92 वर्ष की अवस्था में राजेंद्र सरोवर ,छपरा स्थित उनके आवास में  हुआ। मरणोपरांत छपरा शहर में कई एक स्थानों पर उनकी पावन स्मृति में छोटे -बड़े समारोह  आयोजन किए गए । इसी वर्ष छपरा में उनके नाम पर लायंस क्लब ऑफ  राधो जी के नाम से एक क्लब की भी स्थापना हुई ।
आज उनका 98 वा जन्म दिन है। इस शारदीय नवरात्रि काल में इस पावन अवसर पर मैं अपनी तथा भारतीय जनता पार्टी छपरा की ओर से वैसे महामानव को अपनी भावभीनी हार्दिक श्रद्धांजलि व्यक्त कर गौरवान्वित महसूस करता हूं। विवेक कुमार सिंह ने बताया की राघव जी के जीवन से जुड़ी बहुत सी बातों ने पहले से पता था बहुत से बातें उन्हें उनके पुत्र अजीत सिन्हा जिसे प्राप्त हुई ऐसे महापुरुषों को श्रद्धांजलि देकर स्वयं को गौरवान्वित अनुभूति होती है, माल्यार्पण एवं श्रद्धा सुमन अर्पित करने  वालों में भारतीय जनता पार्टी के जिला मंत्री बलवंत सिंह,  कला संस्कृति  प्रकोष्ठ के पूर्व संयोजक प्रदीप सौरभ,  गौतम प्रसाद , शांतनु कुमार,एवं अजीत सिन्हा, इत्यादि कार्यकर्ता एवं गणमान्य शहर के प्रबुद्ध लोग उपस्थित थे।।
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